रेल कर्मियों के साथ पुनः धोखा – मान्यता प्राप्त यूनियनों ने सरकार से सहमति कर बोनस का लॉलीपॉप दिखाया
Bokaro:
दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस महामंत्री एन. एल. कुमार ने इस बात की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि रेलवे बोर्ड ने आज RBE सं. 84/2026 जारी कर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादकता संबद्ध बोनस (PLB) के नाम पर एक बार फिर रेल कर्मचारियों के साथ छलावा किया है.
मान्यता प्राप्त यूनियनें – AIRF और NFIR – हर बार रेल भवन में सरकार के साथ गुप्त सहमति कर लेती हैं और बाहर आकर कर्मचारियों को 78 दिन का हक़ बताकर लॉलीपॉप दिखा देती हैं, जबकि सच्चाई कुछ और ही है.
7000 की सीलिंग कर्मियों के साथ धोखा-
उन्होंने कहा कि आदेश में कहा गया है कि जहाँ मजूरी 7000 रुपये से अधिक है, वहाँ भी गणना 7000 रुपये के हिसाब से होगी. आज के महंगाई के दौर में जब एक रेलकर्मी की औसत मजूरी 50000 से ऊपर है, तो उसे 7000 पर अटका देना क्या धोखा नहीं है?
17951 की मार से कब उबारे जाएंगे रेलवे कर्मी-
आगे उन्होंने कहा कि आदेश के पैरा 2 में चालाकी से लिख दिया गया है कि जो कर्मचारी किसी भी कारण से पूरे वर्ष सेवा में नहीं रहे, उन्हें सिर्फ 17,951 रुपये दिए जाएंगे. यह प्रावधान अधिकांश रनिंग स्टाफ, नये नियुक्त और मेडिकल छुट्टी पर रहे कर्मचारियों पर सीधा वार है.
मेंस कांग्रेस के बोकारो सचिव राजन उपाध्याय ने कहा कि यह बोनस नहीं, रेल कर्मियों के त्याग का अपमान है. हम दिन-रात, धूप-बारिश, त्योहार-इतवार को भी रेल चलाते हैं, और हमें 78 दिन का हक़ कहकर 17951 रुपये की भीख पकड़ा दी जाती है.
कहा कि रेल कर्मचारी अब जाग चुका है. मान्यता प्राप्त यूनियनों का यह विश्वासघात अब और नहीं चलेगा.
मेंस कांग्रेस की प्रमुख मांगे-
दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस ने माँग की है कि बोनस की गणना वास्तविक वेतन पर हो, 7000 की अंग्रेजों के जमाने की सीलिंग खत्म हो. 17951 रुपये की कैपिंग को तुरंत वापस लिया जाए. PLB का भुगतान 78 दिन की वास्तविक मजूरी के बराबर किया जाए. अन्यथा हमारी मांग सातवीं पे कमिशन की गणना से है और रहेगा.

