राजनीति में सम्मान के साथ समान अवसर की हकदार हैं महिलाएं
Bokaro:
जिओ और जीने दो के बैनर तले कनक लता राय की अध्यक्षता में बोकारो मॉल में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें महिलाओं की नज़र में वर्तमान राजनीति पर चर्चा हुई। भूतपूर्व शिक्षिका सुभद्रा मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएँ वर्तमान राजनीति से संतुष्ट नहीं हैं। कहा कि अपराध पृष्ठभूमि के लोग राजनीति में अधिक पाए जाने लगे हैं। सुधा कुमार ने कहा कि नैतिक शिक्षा का अभाव और नेता बनने की किसी योग्यता का निर्धारण नहीं होना भी विकास में बाधक है। अनिता किरण ने राजनीति को लेकर महिलाओं में जागरुकता की कमी के कारण वोट का सही उपयोग न कर पाने को कमियों में गिनाया। कहा कि सही लोग सामने नहीं आते हैं। रोजमर्रा की समस्याओं से जनता त्रस्त है, बिजली और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित है।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए सत्या ने महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि गुंडों और व्यभिचारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।न्याय मिलने में देर होती है।ज्योति बिस्ट ने राजनेता और राजनीति में सुधार पर बल दिया। ताकि महिलाएं भी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा सके। रंजू सिंह ने कहा कि नेताओं में नैतिक पतन को देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।कहा कि राजनीति में आने वाली महिलाओं को बहुत भेदभाव के साथ अपने चरित्र पर लांछन भी सहने पड़ते हैं। सुमित्रा दीक्षित ने कहा कि वर्तमान राजनीति में चुनाव जीतने के लिए इतने कुकर्म करने पड़ते हैं कि सही आदमी राजनीति से दूर भाग रहे हैं। पैसा और गुंडागर्दी के बल पर अधिकांश चुनाव जीते जा रहें हैं। वहीं जीते हुए लोगों की खरीद फरोख्त होती है।
नयी पीढी का नेतृत्व करने वाली तनया घोष ने कहा कि चूंकि वर्तमान में महिलाएँ शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं। उन्हें राजनीति में आकर, सिस्टम का हिस्सा बनकर बदलाव लाना चाहिए। कल्पना दास ने कहा कि जब परिवार में ही औरतों के विचार और निर्णय मायने नहीं रखते तो फिर उनमें इतना आत्मविश्वास कहाँ से आएगा कि वो देश की राजनीति में हिस्सा लें सकें। कनक लता राय ने कहा कि हमें अपनी काबिलियत दिखाने के लिए अवसर तो उपलब्ध कराया ही जाना चाहिए। राजनीति में महिलाओं की भूमिका भी बराबर की होनी चाहिए। तभी देश का विकास संभव है।सुभद्रा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की।
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