अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन ने डाक सेवा पुनरुथान की उठाई मांग

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Bokaro: 
 भारतीय डाक सेवा को फिर से जनहित में सुचारु करने और पुरानी सेवाओं को पुनः प्रारंभ करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। बोकारो के मुख्य डाकघर के समक्ष आयोजन धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष देव कुमार त्रिवेदी ने की। धरना के उपरांत केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रेषित सात सूत्री मांग पत्र मुख्य डाकघर के डाकपाल को सौंपा गया।
वक्ताओं ने कहा कि कभी देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली भारतीय डाक सेवा, आज उपेक्षा का शिकार है। कई ऐतिहासिक और जनहितकारी सेवाएं जैसे — रजिस्ट्री पोस्ट पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र, और अंडर पोस्टल सर्टिफिकेट (UPC) या तो बंद कर दी गई हैं या इतनी महंगी कर दी गई हैं, कि आम जनता के लिए उनका उपयोग कठिन हो गया है।
प्रदेश अध्यक्ष देव कुमार त्रिवेदी ने कहा कि “सन 1774 से शुरू हुई भारतीय डाक सेवा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं का संवाहक रही है। गांव से शहर और देश से विदेश तक, हर रिश्ते और संवेदना को जोड़ने का काम डाकिया ने किया है। लेकिन आज यह परंपरा टूटती जा रही है। संगठन ने सरकार से रजिस्ट्री पोस्ट सेवा को न्यूनतम शुल्क पर पुनः शुरू करने, अंडर पोस्टल सर्टिफिकेट (UPC) सेवा को गरीब जनता के लिए फिर से शुरू किये जाने, पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय पत्र सेवा को भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में पुनर्जीवित करने, डाक सेवा में आधार, OTP या पहचान पत्र की अनिवार्यता समाप्त करने समेत कई मांग किया है। संगठन ने यह भी कहा कि जहां कई देशों में “बॉक्स डे” मनाकर डाक कर्मियों को सम्मानित किया जाता है, वहीं भारत में डाक कर्मी अब महंगी सेवा और जटिल प्रक्रियाओं के प्रतीक बन गए हैं, जो डाक विभाग की मूल भावना के विपरीत है।

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