मैट्रिक पास ने हुनर को सलाम, बिना प्रशिक्षण के कबाड़ी से बना डाला खेत जोतने वाला छोटा ट्रक्टर

कुछ अलग करने का जुनून सवार हो तो शिक्षा की कमी बाधक नहीं बन सकती। इस बात बोकारो जिला के चंदनकियारी प्रखंड के एक मैट्रिक पास युवक श्यामलाल महतो ने साबित कर दिखा दिया। श्यामलाल महतो चंदनकियारी प्रखंड के सिमुलिया पंचायत के भस्की टोला का निवासी है। मैट्रिक से ठीक एक साल पहले उनके पिता पोदू महतो की मृत्यु हो गई। परिवार के सहयोग से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इसके बाद आगे की पढ़ाई में आर्थिक कमजोरी व व्यवस्था की कमी आड़े आई। 2004 में मैट्रिक पास करने के बाद श्यामलाल ने पढ़ाई छोड़ कर बिजली के उपकरणों के नाथ स्वयं का नाता जोड़ा। इसके लिए न तो कहीं से प्रशिक्षण लिया और न किसी ने मदद की। बिजली तार जोड़ने से शुआ हुआ सफर 2017 में धनबाद जिला के भटिंडा फॉल में 3 हजार वाट का पनबिजली परियोजना बनाने तक पहुंचा। श्यामलाल ने अपने पॉकिट से करीब 35 हजार खर्ज कर अपने जुनून को सफल किया। जो करीब एक सप्ताह तक चला। इस पनबिजली के माध्यम से उसने वहां के 4-5 घरों में बिजली आपूर्ति भी आरंभ कर दी। लकिन ग्रामीणों व सरकार का सपोर्ट नहीं मिलने से वह परियोजना बंद कर वापस गांव लौट आया।
2023 और 2024 में बनाया अलग अलग ट्रक्टर- श्यामलाल यहीं नहीं रूका उसने हिम्मत नहीं हारी। 2023 में उसने एक मिनी ट्रक्टर का निर्माण कबाड़ी के सामग्री से कर डाला। जिस पर करीब 20 हजार रूपए खर्च हुए। पेट्रोल से चलने वाला यह ट्रक्टर एक लीटर में करीब डेढ़ घंटे तक खेतों में जुताई करने में सझम था। इससे श्यामलाल का हौसला और बढ़ गया, क्योंकि जिस ट्रक्टर का निर्माण उसने महज 20 हजार खर्च कर किया था, उसकी बाजार में कीमत 50 से 60 हजार रूपए तक है। ट्रक्टर से अपने खेतों में काम भी लिया जाने लगा। इसके बाद उसने 2024 में सब्जी के बगान में काम के लायक एक इलेक्ट्रिक टक्टर बनाया। इस ट्रक्टर के लिए भी कबाड़ी के सामग्री का उपयोग किया गया। इसे बनाने में करीब साढ़े 17 हजार रूपए खर्च किया गया। अब वे इस मॉडल का पेटेंट कराना चाहते है, ताकि सस्ते दामों पर किसानों का उपलब्ध कराया जा सके।
मैग्नेटिक एनर्जी से बिजली उत्पन्न करने की डिवाईस बनाने की चाह- बिजली के पंखे के अंदर के क्वायल की बैंडिंग जनरली लोग अंदर से बाहर की ओर करते है, इसमें काफी मेहनत लगती है। श्यामलाल ने इस पैटर्न का ही बदल दिया। उन्होंने पंखे के क्वायल को बाहर से अंदर की ओर बांधना आरंभ किया। सफलता मिली। भविष्य में वे मैग्नेटिक एनर्जी पर काम करने की चाह रखते है। जिससे की बिजली के बदले इंवर्टर के तर्ज पर वैकल्पिक व्यवस्था संभव हो। लोगों को कम से कम रूपए में बिजली का नया विकल्प उपलब्ध हो। जिसे चार्ज करने के लिए भी बिजली की जरूरत ही न पड़े।
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