रेलवे की बैरिकेडिंग से बंद हुआ वैकल्पिक रास्ता, जाम के दौरान लोगों की बढ़ेगी परेशानी
Bokaro:
बोकारो में एनएच पर लगने वाले जाम के दौरान राहत देने वाला एक अहम वैकल्पिक मार्ग अब बंद हो गया है। बालीडीह से नया मोड़ जाने वाली सड़क पर रेलवे ने एआरएम बिल्डिंग के पास पुल के समीप बैरिकेडिंग कर दी है, जिससे इस रास्ते से आवागमन पूरी तरह रुक गया है।
अब तक यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होता था। एनएच-23 पर जाम लगने की स्थिति में तीन पहिया और चार पहिया वाहन चालक नया मोड़ से बीएसएल प्लांट की बाउंड्री के किनारे होते हुए रेलवे क्षेत्र पार कर बालीडीह की ओर निकल जाते थे। इससे उन्हें लंबी दूरी और समय दोनों की बचत होती थी। लेकिन बैरिकेडिंग के बाद यह सुविधा समाप्त हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते थे। खासकर बोकारो रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग करीब दो किलोमीटर छोटा पड़ता था। ऐसे में अब लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी।
सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग भी इस निर्णय से प्रभावित हुआ है। बालीडीह, कुर्मीडीह और जैनामोड़ क्षेत्र के कई स्थायी और अस्थायी मजदूर रोजाना इसी मार्ग से साइकिल और बाइक के जरिए बीएसएल प्लांट पहुंचते थे। इसके अलावा रेलवे के विभिन्न विभागों—जैसे आरओएच, यार्ड, डीजल और इलेक्ट्रिक शेड—में काम करने वाले कर्मियों के लिए भी यह रास्ता सुविधाजनक था। अब उन्हें वैकल्पिक लंबा मार्ग अपनाना पड़ेगा।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। झामुमो के बोकारो महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने रेलवे के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि यह सड़क राज्य सरकार के अंतर्गत आती है, ऐसे में रेलवे द्वारा बैरिकेडिंग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही उपायुक्त से बातचीत कर जनहित में बैरिकेडिंग हटाने की मांग की जाएगी।
फिलहाल, इस रास्ते के बंद होने से शहरवासियों को जाम की समस्या से निपटने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
बोकारो में एनएच पर लगने वाले जाम के दौरान राहत देने वाला एक अहम वैकल्पिक मार्ग अब बंद हो गया है। बालीडीह से नया मोड़ जाने वाली सड़क पर रेलवे ने एआरएम बिल्डिंग के पास पुल के समीप बैरिकेडिंग कर दी है, जिससे इस रास्ते से आवागमन पूरी तरह रुक गया है।
अब तक यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होता था। एनएच-23 पर जाम लगने की स्थिति में तीन पहिया और चार पहिया वाहन चालक नया मोड़ से बीएसएल प्लांट की बाउंड्री के किनारे होते हुए रेलवे क्षेत्र पार कर बालीडीह की ओर निकल जाते थे। इससे उन्हें लंबी दूरी और समय दोनों की बचत होती थी। लेकिन बैरिकेडिंग के बाद यह सुविधा समाप्त हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते थे। खासकर बोकारो रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग करीब दो किलोमीटर छोटा पड़ता था। ऐसे में अब लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी।
सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग भी इस निर्णय से प्रभावित हुआ है। बालीडीह, कुर्मीडीह और जैनामोड़ क्षेत्र के कई स्थायी और अस्थायी मजदूर रोजाना इसी मार्ग से साइकिल और बाइक के जरिए बीएसएल प्लांट पहुंचते थे। इसके अलावा रेलवे के विभिन्न विभागों—जैसे आरओएच, यार्ड, डीजल और इलेक्ट्रिक शेड—में काम करने वाले कर्मियों के लिए भी यह रास्ता सुविधाजनक था। अब उन्हें वैकल्पिक लंबा मार्ग अपनाना पड़ेगा।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। झामुमो के बोकारो महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने रेलवे के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि यह सड़क राज्य सरकार के अंतर्गत आती है, ऐसे में रेलवे द्वारा बैरिकेडिंग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही उपायुक्त से बातचीत कर जनहित में बैरिकेडिंग हटाने की मांग की जाएगी।
फिलहाल, इस रास्ते के बंद होने से शहरवासियों को जाम की समस्या से निपटने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
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