दूसरे दिन भी तुपकाडीह नहर रोड़ पर स्लेग लदे भारी वाहनों का परिचालन रहा ठप, ग्रामीणों का आंदोलन जारी 

दूसरे दिन भी तुपकाडीह नहर रोड़ पर स्लेग लदे भारी वाहनों का परिचालन रहा ठप, ग्रामीणों का आंदोलन जारी 
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Bokaro :
बीएसएल प्लांट के स्लेग डंप एरिया क्षेत्र से स्लेग लदे भारी वाहनों का परिचालन तुपकाडीह तेनु नहर सड़क पर होने की वजह से जर्जर हुई सडक व उड़ते धूल मिट्टी से उत्पन्न प्रदूषण, बाधित यातायात तथा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ में ग्रामीणों द्वारा बंदी का असर दूसरे दिन भी दिखा। गाड़ियों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा। बीरबल मरांडी ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाता और आसपास के लोगों को राहत नहीं मिलती, तब तक स्लेग लदे भारी वाहनों का आवाजाही पूर्णतः बंद रहेगी। इधर युवकों द्वारा उठाई गई आवाज पर ग्रामीणों व बाजार वासियों ने जायज बताया।
 ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अपनी जमीन देकर प्लांट की स्थापना में सहयोग किया, लेकिन अब प्रबंधन और ठेकेदारों की मनमानी का खामियाजा विस्थापितों को सौगात में प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कहा कि स्लेग ढुलाई के दौरान उड़ने वाली  धूल मिट्टी से पूरा वातावरण प्रदूषित हो जाता है। गांव के पेड़-पौधों की पत्तियां काली पड़ चुकी हैं तथा घरों की छतों पर धूल व मोटी की परत जम जाती है। इतना ही नहीं, खुले कुआ का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।कहा कि इस सड़क से हर दिन प्लांट कर्मचारी, ठेका मजदूर व आसपास बसे गांव के लोगों के लिए मुख्य मार्ग है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई हाइवा वाहन ओवरलोड स्लेग लेकर खुले में परिवहन करती हैं जो खतरे की घंटी साबित हो सकती है।इस धंधे के संचालन कर्ता के रूप में स्थानीय दलाल तबके के लोगो को बंधी बंधाई राशि मिलती हैं। राजन कर्मकार, रसिक हेंब्रम, बहादुर मांझी, विंतोष सोरेन, विश्वजीत सोरेन, गोतम कर्मकार, हीरालाल सोरेन, सुभाष सोरेन मोहन कर्मकार, जोगेंद्र सोरेन आदि मौजूद थे।

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