बाउंड्री वाल का प्लस्तर करने के लिए डालमिया सीमेंट कंपनी ने पड़ोसी के जमीन के पेड़ों को काटा
बोकारो औधोगिक क्षेत्र स्थित डालमिया भारत सीमेंट प्लांट द्वारा अपने बाउंड्री वाल का प्लस्तर करने के लिए रैयत की जमींन पर खड़ा पेड़ को काट कर गिरा दिया गया। रैयत प्रह्लाद महतो ने कहा कि कंपनी मेरे जमीन के कुछ हिस्से का समतलीकरण कर अपनी बाउंड्री वाल का प्लस्तर करने से पहले मुझे सूचित तक नहीं किया गया। मनमाने ढंग से काम करते हुए कंपनी प्रबंधन ने मेरे जमीन पर खड़ा पेड़ भी काट दिया। इस संबंध में बालीडीह ओपी को लिखित शिकायत दी गई। थाना द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कंपनी को अवैध रूप से किसी भी प्रकार का काम पर रोक लगाते हुए कंपनी को जमीन के कागज़ सहित थाने में आने को कहा। लेकिन कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि थाना नहीं पहुंचे। इसी बीच कंपनी ने शुक्रवार को पुनः अवैध रूप उक्त जमीन पर घुस कर, माचान बनाकर काम आरंभ कर दिया।
4 एकड़ जमीन अधिग्रहण के बदले 4 नौकरी देने के वादा से मुकर गया प्रबंधन-
रैयत प्रह्लाद महतो ने कहा कि यहां पर हमारा 9 एकड़ 16 डिसमिल के आसपास जमीन है। 2011 में जेपी सीमेंट प्लांट द्वारा 4 एकड़ जमीन का अधिग्रहण से संबंधित क्रय किया गया वो भी विभिन्न मुद्दों मे आज तक विवादीत होने की सम्भावना है । इसके एवज में 4 लोगों को नियोजन देने का वादा किया गया था। अब डालमिया सीमेंट प्रबंधन इस कंपनी का संचालन कर रहा है और यह कंपनी भी नौकरी देने का वादा किया और मुकर गया । एक बेटे को अभी तक लिखित वादा कर के नौकरी नही दीया । कुछ को अभी तक 2014 से नौकरी स्थायी नही किया गया है।
जमीन का नहीं मिला उचित मुआवजा- रैयत प्रह्लाद महतो ने कहा कि जो जमीन कंपनी प्रबंधन के द्वारा अधिग्रहण किया गया, उससे संबंधित विभिन्न तरह का भुगतान भी नहीं किया गया। वर्तमान में कंपनी के बाउंड्री के बगल में स्थित मेरी जमीन पर कंपनी द्वारा कचरा, प्लांट का मटेरियल डमपींग किया जा रहा है और लगभग 10 वर्षों से लगातार किया गया है । बिना सूचना के मेरे जमीन पर पेड़ को काट गिराया गया, विभिन्न प्रकार से डराया गया।अवैध रूप से मेरे जमीन पर बिना मेरी अनुमति के 132 KV का तार पार कर दिया है जिससे सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है। यहां तक कि दामाद को उचित पे-रोल भी नहीं दिया जा रहा है।
इस तरह के कंपनी के कृत के कारण मुझे लगातार आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, संपत्ति एवं अन्य संबंधित हानि हुई है और मेरे परिवार की आजीविका का मुख्य एवं एकमात्र साधन कृषि भूमि ही थी। उक्त भूमि के कंपनी द्वारा अधिग्रहण / क्रय किये जाने के उपरांत, वादानुसार नौकरी उपलब्ध नहीं कराए जाने से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई है। वर्तमान में बेरोजगारी एवं आय के अभाव के कारण परिवार को जीवन-यापन, भरण-पोषण तथा दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में गंभीर कठिनाइयों एवं मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के द्वारा रैयत के साथ इस तरह का कृत बहुत डरावना और चिन्ताजनक , विश्वासघाती प्रतित होता है ।
इधर, प्रह्लाद महतो के आरोप पर कंपनी के कॉरपोरेट हेड ने इस प्रकार की किसी भी जानकारी होने से इंकार किया।


