कसमार में सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ मुहर्रम पर्व

कसमार में सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ मुहर्रम पर्व
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Bokaro:

कसमार प्रखंड में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को शांति ओर सौहार्द्रपूर्ण तरीके से संम्पन्न हो गया। मुहर्रम के अहले सुबह कसमार के गर्री चौबे टोला दुर्गा मंदिर प्रांगण में ताजिये के साथ लाठी खेल का आयोजन किया गया। इसके अलावा सुरजुडीह में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार काली मंदिर परिसर में भी ताजिये के साथ लाठी खेल का करतब युवाओं ने दिखाया।

इस दौरान पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, बेरमो एसडीओ मनोज कुमार, कसमार सीओ नरेंद्र कुमार सिंह, बीडीओ नम्रता जोशी, थाना प्रभारी कुंदन कुमार समेत स्थानीय प्रशासन के कई अधिकारी शामिल होकर जगह जगह शांति व्यवस्था का जायजा लिया। मुहर्रम में दोपहर बाद कसमार के गर्री, सुरजुडीह, बगदा, मधुकरपुर, मंजूरा, बगियारी , खैराचातर, बनकनारी, मोचरो, बरईकला, ललमटीया, कुरको, नावाजारा, कुलागुजु, चण्डीपुर, मायापुर, करमा सहित कई गांवों मे आकर्षक ताजिया के साथ लोगों ने जुलूस निकाला। प्रखंड मुख्यालय के निकट गांधी मैदान एवं खुशहाल बाग सुरजूडीह में हंसलता, मंजुरा, गर्री, वनकनारी, मोचरो गांव से आये ताजिया का मिलन हुआ। इस दौरान आकर्षक लाठी खेल तथा झांकी का प्रदर्शन भी स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया। गांधी मैदान में अन्य कई गांवों से आये कलाकारों द्वारा लाठी खेल के साथ देशभक्ति झांकी पेश किया। इस दौरान कलाकारों ने बिरसा मुंडा, हूल दिवस समेत कई आकर्षक झांकी की प्रस्तुति कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, साहस, धैर्य और न्याय के लिए संघर्ष की अमर गाथा है। हजरत इमाम हुसैन की कर्बला की शहादत पूरी मानवता को यह संदेश देती है कि सत्य और न्याय की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में अडिग रहना चाहिए। मुहर्रम का संदेश समाज में भाईचारे, एकता और इंसानियत की भावना को सुदृढ़ करता है, जिसे हम सभी को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर गर्री अंजुमन कमिटी के सदर शेरे आलम, मासूम रजा, तनवीर आलम, मोबिन अंसारी, मुस्ताक अंसारी, मकीम अहमद, सुरजुडीह में मौलाना रूहुल होदा, नसरुल होदा, इरफान अंसारी, इसराइल अंसारी, इकबाल अंसारी, अब्बास अंसारी, सोहेल अंसारी, फारुख अंसारी, रुस्तम अंसारी, इकबाल जावेद, इनामुल हक, राजा बाबू, शमशेर आलम, फारुख अंसारी समेत अन्य सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

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